ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार::कोहिनूर ना रहा… अब यादें रही

आरिफ आसिफ शेख,

फिल्म इंडस्ट्री में नाम कमाना और उसे बनायें रखना ऐसा बहुत ही कम लोग कर पाते है। इस फिल्म जगत में कई कलाकार आते है और चले जाते है। लेकीन कुछ ऐसे है जिन्होेंने इस फिल्म इंडस्ट्री का इतिहास ही पलट कर रख दिया, इस सूची में युसूफ खान यानी दिलीप कुमार साहब का नाम सबसे पहले नंबर लिया जाएगा। सिनेमा जगत के सुपरस्‍टार दिलीप कुमार का निधन हो गया। काफी दिनों से दिलीप कुमार बीमार चल रहे थे। उन्‍होंने ७ जुलाई बुधवार को सुबह सात बजे के करीब मुंबई के हिंदुजा अस्‍पताल के आईसीयू में अंतिम सांस ली। सिल्‍वर स्‍क्रीन पर अपनी अदाकारी से लोगों को रुला देने वाले दिलीप कुमार साहब को दुनिया ‘ट्रेजडी किंग’ के नाम से जानती थी। 98 साल के दिलीप कुमार साहब ने भारतीय सिनेमा में मेथड ऐक्टिंग की शुरुआत की। ब्‍लैक ऐंड वाइट फिल्‍मों के दौर में दिलीप कुमार हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े अदाकार रहे। दुर्भाग्‍य से, वे अब इस दुनिया में नहीं रहे।आज दिलीप कुमार के रूप में बॉलीवूड ने एक लीजेंड को खो दिया है। ‘एक शानदार अभिनेता की जिंदगी पर पर्दा भले ही गिर गया हो लेकिन उनकी बेहतरीन परफॉर्मेंसेज के जरिए वे हमेशा याद रहेंगे।’ दिलीप कुमार का जाना एक ‘युग का खत्‍म’ हो जाना है। दिलीप साहब, आखिरी बार 1998 में आई फिल्‍म ‘किला’ में दिखे थे । वर्ष 1944 में ‘ज्वार भाटा’ से अपना फिल्‍मी करिअर शुरू करने वाले मोहम्मद युसुफ खान यानी दिलीप कुमार अगले पांच दशक तक सक्रिय रहे। उन्‍होंने मुगल-ए-आजम, देवदास, नया दौर, मधुमति तथा राम और श्याम जैसी कई हिट फिल्में दीं।

दिलीप कुमार उर्फ मोहम्मद युसूफ खान भारतीय हिंदी सिनेमा के एक प्रसिद्ध दिग्गज अभिनेता थे। दिलीप कुमार अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ अभिनेता थे। अपनी भूमिका के लिए प्रसिद्ध होने के कारण उन्हें *ट्रैजडी किंग * के रूप में जाना जाने लगा। दिलीप कुमार को भारतीय फिल्म में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दादा साहब फाल्के पुरस्कार, पद्म भूषण, पद्म विभूषण और पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए-इम्तियाज पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साल 2000 में दिलीप कुमार राज्यसभा के सदस्य भी थे।

दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसंबर 1922 को पेशावर, वर्तमान पाकिस्तान में हुआ था। उनके बचपन का नाम मोहम्मद युसूफ खान था। उनके पिता का नाम लाला गुलाम सरवर था। जो अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए फल बेचते थे। भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के समय वे अपने परिवार के साथ मुंबई में बस गए थे। उनका प्रारंभिक जीवन बहुत व्यस्त था। यूसुफ खान ने पुणे में एक कैंटीन में काम करना शुरू किया जब उनके पिता ने फल बेचने का व्यवसाय खो दिया। यहीं पर देविका रानी ने उन्हें देखा और दिलीप कुमार को अभिनेता बना दिया। देविका रानी ने उनका नाम युसूफ खान से बदलकर *दिलीप कुमार* कर लिया। इस तरह 25 साल की उम्र में दिलीप कुमार नंबर वन अभिनेता बन गए।
दिलीप कुमार की पहली फिल्म ‘ज्वार भाटा’ थी। ज्वारभाटा 1944 में रिलीज़ हुई थी। उनकी पहली हिट फिल्म ‘जुगनू’ थी। 1947 में रिलीज हुई इस फिल्म ने दिलीप कुमार को बॉलीवुड का हिट स्टार बना दिया था। 1949 में दिलीप कुमार ने अंदाज़ में राजकपुर के साथ पहली बार काम किया। फिल्म भी जबरदस्त हिट हुई थी। बाद में, दिलीप कुमार ‘दीदार’ (1951) और ‘देवदास’ में अपनी गंभीर भूमिकाओं के कारण बहुत लोकप्रिय हुए और उन्हें ट्रेजेडी किंग कहा जाने लगा। उन्होंने ‘मुगल-ए-आजम’ में मुगल राजकुमार सलीम का किरदार बखूबी निभाया। फिर आई दिलीप कुमार की ‘राम और श्याम’, ‘कर्म, क्रांति, इज्जतदार, सौदागर’ और दिलीप कुमार के रोल को दर्शकों ने खूब सराहा।
दिलीप कुमार की शादी मशहूर अभिनेत्री सायरा बानो से 1966 में हुई थी। शादी के वक्त दिलीप कुमार की उम्र 44 साल और सायरा बानो की उम्र महज 22 साल थी। ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार आज हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी फिल्मों की लोकप्रियता कम नहीं होगी। हिंदी सिनेमा ने कई कलाकार दिये लेकिन दिलीप कुमार एक ऐसे अभिनेता थे जिनकी कहानी ही अलग थी। छह दशकों तक बेमिसाल फिल्मे और बेमिसाल सौगात देकर महान अभिनेता दिलीप कुमार अलविदा कह गयें। उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि!

 

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