उत्तर भारत के ऐतिहासिक भोजन थाली परिक्रमा मेला व कुश्ती दंगल का कोरोना के चलते प्रशासनिक स्वीकृति नहीं,कस्बा वासियों ने कामसेन स्टेडियम में कराया ध्वजारोहण, बाल कुश्ती कराकर निभाई परंपरा

राजस्थान संपादक एवं ब्यूरो चीफ
यतेन्द्र पाण्डेय्
कामा- भरतपुर से

हरिओम मीणा की रिपोर्ट
भरतपुर — जिले के कामा कस्बे में भाद्रपद सुदी दौज को हर वर्ष कामां मे आयोजित होने वाले उत्तर भारत के ऐतिहासिक भोजन थाली परिक्रमा मेला व कुश्ती दंगल का कोरोना के चलते प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिलने के कारण इस बार आयोजन नहीं हो पा रहा है|
सामाजिक कार्यकर्ता विजय मिश्रा, पूर्व पार्षद बृजलाल सैनी, साहित्यकार छुट्टन खान साहिल, अखाड़ा उस्ताद गोपाल प्रसाद शर्मा ने बताया कि कामवन भोजन थाली परिक्रमा व कुश्ती दंगल मेला मेले की परंपराओं के अनुसार भाद्रपद सुदी दूज को भोजन थाली नामक धार्मिक स्थल पर मिला जुड़ता है इसी दिन सुबह नगर पालिका द्वारा ऐतिहासिक लाल दरवाजे पर गणेश पूजन के साथ मेले का शुभारंभ किया जाता है और कोट ऊपर कामसेन स्टेडियम में ध्वजारोहण कर अखाड़ा पूजन किया जाता है विजय मिश्रा ने बताया कि नगर पालिका बुधवार को लाल दरवाजे पर गणेश पूजन तो कर दिया गया लेकिन कामसेन स्टेडियम में ध्वजारोहण व अखाड़ा पूजन व कुश्ती कराने की परंपरा को भूल गई| सुपर गुरुवार को कामा कस्बे के गणमान्य नागरिकों ने कोट ऊपर कामसेन स्टेडियम पहुंचकर ध्वजारोहण किया हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई चारों समुदायों के बच्चों ने मिलकर ध्वजारोहण किया, ध्वजारोहण के बाद विधि विधान से अखाड़ा उस्ताद गोपाल प्रसाद शर्मा द्वारा कुश्ती दंगल अखाड़ा का पूजन किया गया और बाल कुशितियां करा कर मेले की परंपराओं का निर्वाह किया गया और कुश्ती जीतने वाले बाल पहलवानों को पुरस्कार दिए गए इस अवसर पर पूर्व पार्षद प्रदीप गोयल, पूर्व पार्षद शिवराम सैनी, वयोवृद्ध साहित्यकार छुट्टन का साहिल, समाज सेवी लक्ष्मीनारायण चौधरी ,शारीरिक शिक्षक थान सिंह शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद थे|

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