राजस्थानी रामलीला का मंचन शुरु,कान खोलगे सुण अयोध्या रा राजा …

ब्यूरो चीफ गोविन्द भार्गव
सूरतगढ़ —राजस्थानी भाषा की मान्यता की मांग को लेकर अनूठे तरीके से खेली जाने वाली राजस्थानी रामलीला का विगत रात्रि को मंचन शुरू हुआ । इस रात्रि की लीला में मुख्य अतिथि के रुप में पूर्व विधायक गंगाजल मील , पालिकाअध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा , राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष व पार्षद परसराम भाटिया , राजेंद्र उपाध्याय , महेंद्र सिंह जाटव ने अतिथि के रूप में लीला का उद्घाटन कर भगवान श्री गणेश की आरती की व लीला की शुरुआत करवाई । इस मौके पर पूर्व विधायक ने कहा कि हमारे धार्मिक ग्रंथ हमें सामाजिक जीवन को किस तरह से जीना चाहिए का संदेश देते हैं ।राजस्थानी रामलीला का मंचन इसलिए विशेष हो जाता है कि यह एक पंथ दो काज वाला कार्य है । जिसमें हरि कीर्तन , हरि भजन , प्रभु सिमरन के साथ-साथ कर्म कर्तव्य मार्ग के पथ पर अपनी भाषा की मान्यता को लेकर उचित तरीके से देश-विदेश में प्रसारित इस रामलीला का मंचन विगत 6 वर्षों से किया जा रहा है । इस वर्ष फिर यह लीला देखने को मिल रही है । मील ने कलाकारों का हौसला अफजाई करते हुए कहा कि निश्चय ही वह दिन दूर नहीं जब राजस्थान के लोगों को उनकी भाषा का मुकम्मल सम्मान प्राप्त होगा । पालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा ने कहा कि भाषा की इस लड़ाई में नगर पालिका मंडल सूरतगढ़ सदैव उग्रणीय भूमिका में उपस्थित मिलेगा । राजेंद्र उपाध्याय ने अपने संभाषण में कहा कि सूरतगढ़ सदैव भाषा के इस आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर प्रदेश के साथ अगली पंक्ति में रहता है। जिस दिन भाषा मान्यता आन्दोलन का इतिहास लिखा जाएगा राजस्थानी रामलीला का नाम स्वर्णिम अक्षरो में होगा । परसराम भाटिया ने कहा कि हम विगत 70 वर्षों से भाषा की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार व राज्य सरकारें अपने दायित्व का निर्वहन नहीं करते हुए राजस्थान के लोगों को भाषा की आजादी नहीं दे पा रही है । इससे जनता में भारी रोष भी है लेकिन वह दिन दूर नहीं जब हम सब का प्रयास रंग लाएगा और भाषा को मान्यता मिलेगी ।
बीती रात की लीला में नारद मोह की लीला , जिसमें दिखाया गया कि कामदेव पर विजय प्राप्त करने के बाद नारद जी को अभिमान हो जाता है और विष्णु द्वारा नारद जी का अभिमान मर्दन करने के बाद उन्हें अपनी गलती का एहसास होता है। इसी प्रकार लीला को आगे बढ़ाते हुए मात-पिता भक्त श्रवण का राजा दशरथ द्वारा शिकार के धोखे में वध होना वह उनके माता पिता अंधे माता पिता का रूदन देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गई तो रावण नंदी संवाद सुनकर दर्शक रोमांचित हो उठे ।
संस्था अध्यक्ष ओम साबणियां , संरक्षक रामेश्वरलाल स्वामी , तेजपाल सिंह ने मेहमानों का स्वागत किया वआभार व्यक्त किया । राजस्थानी रामलीला के सृजक मनोज कुमार स्वामी , निदेशक अमरिश ज़ंवरिया ने बताया कि किस तरह से वे लोग एक माह से अभ्यास करते हुए राजस्थानी भाषा की अखंड ज्योत को जगाने में लगे हुए हैं ।

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