आपातकाल के दौरान स्वतंत्रता आंदोलन से भी अधिक यातनाएं दी गई — लोकतंत्र रक्षक सेनानी वीरेंद्र कुमार अटल

ब्यूरो चीफ आर के जोशी 

बरेली– 25 जून 1975 को तत्कालीन केंद्र सरकार ने लोकतंत्र की हत्या कर तानाशाही का राज स्थापित कर दिया था यह कहना है लोकतंत्र रक्षक सेनानी वीरेंद्र कुमार अटल का। वह आज लोकतंत्र विजय दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित विचार गोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने आलोचना करते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री ने आपातकाल लगाकर देश के मौलिक अधिकारों का जहां हनन कर लिया था वही प्रेस पर भी सेंसरशिप लगा दी थी। कांग्रेश विरोधी राजनीतिक दलों के नेताओं छात्रों को गिरफ्तार कर जेल की काल कोठरी में बंद कर दिया गया था। उस दौर में स्वतंत्रता आंदोलन से भी अधिक यातनाएं दी गई। 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में देश की जनता ने तानाशाही कांग्रेश सरकार का तख्तापलट कर दिया था और जनता पार्टी की सरकार स्थापित कर दी थी। परिणाम स्वरूप 21 मार्च 1977 को एक बार फिर तानाशाही को हटाकर लोकतंत्र की बहाली की गई। । इसलिए आपातकाल के योद्धा इस दिन को लोकतंत्र विजय दिवस का आयोजन करते हैं। श्री अटल है जोर देकर कहा हम सब लोकतंत्र सेनानियों की जिम्मेदारी है के वर्तमान छात्र और युवा पीढ़ी को आपातकाल के इतिहास से परिचित कराएं। उन्होंने आवाहन किया की युवा पीढ़ी को तानाशाही के खिलाफ लोकतंत्र की बहाली के लिए लड़े गए कालखंड से परिचित कराने के लिए वाद विवाद प्रतियोगिता और चित्र बनाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर विनोद कुमार गुप्ता ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए युवा पीढ़ी को जागरूक करना हम सबकी जिम्मेदारी है। विचार गोष्ठी में अध्यक्षता कर रहे राजेंद्र बहादुर चौधरी। सुरेश बाबू मिश्रा सतीश शर्मा सुमंत महेश्वरी शिशुपाल सिंह राजेंद्र पाल सिंह ने भी विचार व्यक्त किए

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