बॉलीवुड की प्रख्यात कोरियोग्राफर सरोज खान नहीं रही,रिश्ता निभाना जानती थी सरोज  

सुनील कुमार ठाकुर मुंबई

बॉलीवुड की प्रख्यात कोरियॉग्राफर सरोज खान का शुक्रवार देर रात कार्डियक अरेस्ट के चलते मुंबई में निधन हो गया। वह 71 साल की थीं। सरोज खान 17 जून से मुंबई के बांद्रा में स्थित गुरु नानक हॉस्पिटल में भर्ती थीं। उन्हें सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद यहां भर्ती कराया गया था। प्राप्त जानकारी के मुताबिक रात 1.52 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। सरोज काफी समय से डायबिटीज और इससे संबंधित बीमारियों से जूझ रही थीं। हॉस्पिटल में भर्ती होने के बाद उनका कोरोना टेस्ट भी कराया गया था, जिसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई थी।

सरोज के बारेमें बता दे कि वह बॉलीवुड की झगमगाहट का एक हिस्सा थी पर वह कभी भी इस भीड़ में खोई नहीं.फिल्म इंडस्ट्री के सुपर स्टारों से लेकर

डायरेक्टर,प्रोड्यूसर और अभिनेत्रियों से वह जिस तरह से पेश आती थी ठीक उसी तरह से आम आदमी के साथ भी उनका वैसा ही बर्ताव था.वह मिलनसार थी और उन्हें अपने बड़प्पन पर घमंड नहीं था.एक्सप्रेस वन न्यूज़ के प्रधान संपादक सुनील कुमार ठाकुर द्वारा सम्पादित ‘तापीपुत्र’अखबार की विशेष सप्लीमेंट और जानेमाने सूफी शायर उस्मान जौहरी लिखित गजलों की किताबों का विमोचन सरोज के हाथों महाराष्ट्र के जलगांव शहर में  हुआ था.तब सारा शहर सरोज की सादगी का दीवाना हो गया था.उस्मान जौहरी बतातें है कि सरोज रिश्ता निभाना बखूबी जानती थी.एक बार वह किसी को अपना बना ले तो वह कभी भी उसे भूलती नहीं थी. फिल्मों की बड़ी इस हस्ती को तामझाम भी पसंद नहीं था.  

 एएनआई ने ख़बर दी है कि सरोज ख़ान की अंत्येष्टि मुंबई के मलाड इलाक़े में मालवाणी क़ब्रिस्तान में होगी।सरोज ख़ान की गिनती भारत की फ़िल्म इंडस्ट्री के दिग्गज नृत्य निर्देशकों में होती है

।उन्होंने अपना करियर एक असिस्टेंट कोरियोग्राफ़र के तौर पर शुरू किया था। 1974 में फ़िल्म गीता मेरा नाम में उन्होंने पहली बार गानों को स्वतंत्र रूप से निर्देशित किया। सरोज ख़ान ने 2000 से ज़्यादा गानों को कोरियोग्राफ़ किया। उन्हें जिन गानों से प्रसिद्धि मिली उनमें तेज़ाब फ़िल्म का गाना एक-दो-तीन, देवदास का ‘डोला रे डोला’ और जब वी मेट का गाना ‘ये इश्क हाय’रामलखन का मेरे लखन ने बड़ा दुःख दीना’ जैसे गाने शामिल हैं।सरोज ख़ान की अंतिम फ़िल्म जो पर्दे पर आई वो थी कलंक जिसमें उन्होंने अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के गाने तबाह हो गई को निर्देशित किया था।उन्हें तीन बार बेस्ट कोरियोग्राफ़ी का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। नेशनल अवॉर्ड उन्हें फ़िल्म देवदास और जब वी मेट के अलावा तमिल फ़िल्म श्रृंगारम के लिए मिला।हाल के वर्षों में वो टीवी पर होने वाले डांस

रियलिटी कार्यक्रमों में निर्णायक या जज के तौर पर हिस्सा लेती रही थीं।  उन्हें टीवी पर नच बलिए, झलक दिखला जा और नचले वे विद सरोज ख़ान जैसे कार्यक्रमों में देखा गया था। सरोज खान दो अन्य न्यायाधीशों के साथ स्टार वन पर प्रसारित जो २००५ नच बलिए में निर्णायक मंडल के एक सदस्य के रूप में एक रियलिटी डांस शो में दिखाई दि गई थी। नच बलिए के दूसरे सीज़न मे भी न्यायाधीश रहि। वह हाल ही में सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन (इंडिया) पर प्रसारित हो रहे जो शो “उस्तदो का उस्ताद ‘के लिए एक न्यायाधीश भी रही है। वह एनडीटीवी इमेजिन पर प्रसारित किया गया शो नच लेवे वित सरोज खान 2008 में दिखाई दि। वह इस शो के लिए नृत्यकला कि थी। वह सोनी के शो बूगी वूगी (टीवी श्रृंखला) दिसंबर २००८ मे भी दिखाई दी गई थी। वह् एक न्यायाधीशों मे से थी जावेद जाफरी, नावेद जाफरी और रवि बहल के साथ। वह झलक दिखला जा फ़रवरी २७,२००९ के तिसरे सीज़न मे पूर्व नच बलिए न्यायाधीशों वैभवी मर्चेंट और अभिनेत्री जूही चावला के साथ सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन (इंडिया) मे भि दिखई दि। वह वर्तमान में डांस रियलिटी शो नच लै वे विथ सरोज खान मे भी

न्यायाधीश रह छुकी है। वह मेजबानी की है और नचले वे विथ् सरोज खान पूरा कर लिया है। २०१२ में, द सरोज खान स्तोर्यि पि अस बि टी और भारत का फिल्म प्रभाग द्वारा निर्मित और निधि तुली द्वारा निर्देशित वृत्तचित्र जारी किया गया था।

  सरोज खान की माँ और पिताजी क्रिश्छन्द् साधु सिंह और नोनी साधु सिंह है। निर्मला जो सरोज खान के नाम से प्रसिद है उन्के माता-पिता भारत के विभाजन के बाद भारत चले आए थे। वह एक मुस्लिम से शादी की है। उन्का नाम सर्दार् रोशन खान है और वहि से उनका अन्तिम नाम खान अता है। उन्होने नृत्य कि शिक्षा बी सोहनलाल से ली। एक पाकिस्तानी टीवी शो पर अपने खुद के इकबालिया बयान के अनुसार वे इस्लाम को शादि से पहले ही कूबुल कर लिया था। तेरह साल कि उम्र मे उन्होने बी सोहनलाल से शादि करली जो कि उस समय के एक प्रसिद्ध नृत्य गुरु थे।

सोहन लाल (४१ साल) पहले हि शादि शुदा थे और उन्हे ४ बच्चों भी थे। चौदह साल की उम्र में उन्होने अप्ने पहले बच्चे हामिद खान को जनम दिय, जो अब राजू खान के नाम से एक प्रसिद्ध नृत्यरचना-कार है। १९६५ में वह सोहन्लाल् से अलग हुई, लेकिन उनके सहायक के रूप में काम करती रही थी। सोहनलाल और सरोज खान का पुनर्मिलन तब हुआ जब सोहनलाल को दिल का दौरा पड़ा था। सरोज खान को सोहनलाल से और एक बच्चा हुआ.उनकी बेटी हिना खान (कोयल)। सोहनलाल यह सरोज खान और उनके दो बच्चों को पीछे छोड़कर् मद्रास चले गये। उसके बाद वह सरदार रोशन खान के साथ शादी कि और एक बेटी सुकैना  को जन्म दिया। जो अब दुबई में एक नृत्य संस्थान चलाती है।

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