इस बार मेयर की सीट सामान्य महिला भी हो सकती है,चर्चाओं से दावेदारों में खलबली

ब्यूरो चीफ आर के जोशी 

बरेली। निकाय चुनाव की चर्चाएं अब गली-गली में शुरू हो गईं। इस बार मेयर सीट के बदलने को लेकर भी कयासबाजी चल रही है। अभी तक मेयर सीट ओबीसी होने की चर्चा थी, लेकिन मंगलवार को बरेली से लेकर लखनऊ तक मेयर पद पर महिला की ताजपोशी की तैयारी होने की चर्चाएं आम हो गईं। बरेली मेयर की सीट ”सामान्य महिला” आरक्षित होने की उम्मीद जताई जा रही है।

मेयर सीट महिला के लिए आरक्षित होने के बाद दावेदारों में मायूसी छा गई है। महापौर का चुनाव लड़ने के लिए सबसे ज्यादा आवेदन पुरुषों ने ही किए हैं। अब महिला सीट होने की खबर के बाद सपा और भाजपा में कद्दावर महिलाओं की तलाश तेज हो गई है। 2006 में बरेली में पहली महिला मेयर सुप्रिया ऐरन बनी थीं।

भाजपा सशक्त
महिला प्रत्याशी का भी कर सकती है चयन

महिलाओं के दावेदारी के बीच भाजपा दूसरे दलों में भी सक्रिय महिला पर दांव खेल सकती है। राजनीतिक क्षेत्र में चर्चा हो रही है भाजपा की नजर में विरोधी दल की एक महिला ऐसी हैं, जिसके पति भी राजनीति में सक्रिय हैं और उनकी साफ छवि भी है, उस पर दांव लगा सकती है।

इसके बाद अब 2022 में मेयर की सीट महिला होने की चर्चा तेज है। इस बार सामान्य महिला मेयर का चुनाव लड़ सकेगी। इस बात की अभी घोषणा नहीं हुई है, लेकिन ज्यादा संभावना महिला सीट ही होने की बात कही जा रही है। महिला सीट होने से दोनों प्रमुख दलों के पुरुष प्रत्याशियों को मायूसी हाथ लगी है। कुछ पुरुष प्रत्याशियों ने अपनी पत्नियों को चुनाव लड़ाने की तैयारी शुरू कर दी है, जबकि भाजपा में कुछ महिलाओं ने अपनी सक्रियता दिखाते हुए दावेदारी को कदम बढ़ाया है।

सपा में कुछ महिलाओं ने किया है आवेदन

सपा से कुछ महिलाओं ने आवेदन किया है, लेकिन उनके नाम का खुलासा चुनाव प्रभारी ने नहीं किया है। सपा से माना जा रहा है कि सुप्रिया ऐरन चुनाव लड़ सकती हैं यदि उनके पति ने अनुमति तो। लेकिन उन्होंने आवेदन नहीं किया है।

अभी कयासबाजी है। पहले आरक्षण तो घोषित होने दीजिए। अभी सब कुछ पिटारे में छिपा है और पिटारे में बहुत कुछ है। पत्नी का लड़ना अभी तय नहीं है। इसका फैसला पार्टी करेगी—डा. उमेश गौतम, मेयर।

हर बार चुनाव लड़ना शोभा नहीं देता। हर चुनाव सुप्रिया या प्रवीण सिंह ऐरन ही लड़ें। विधानसभा चुनाव में हम कम वोट से हारे हैं। पार्टी में और भी कार्यकर्ता हैं। उन्हें भी आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए। इस बार चुनाव लड़ने में इंट्रेस्ट नहीं है—प्रवीण सिंह ऐरन, पूर्व सांसद।

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