सपनों का अनुगामी यश अजय सिंह

सुनील कुमार ठाकुर,मुंबई

मुंबई.सपना हर व्यक्ति देखता है. कोई सोते वक्त तो कोई खुली आंखों से .कुछ लोग सपने को सिर्फ सपना समझ कर भूल जाते हैं, वहीं उनमें कुछ विशेष लोग होते हैं जो अपनी मेहनत और लगन से उसको हकीकत में परिवर्तित कर खुशहाल जिंदगी जीते हैं.
एक लड़का अपने किसान पिता को हर रोज खेत में काम करते हुए देखता है तो सपनों में खो जाता कि हम भी एक दिन कुछ ऐसा करेंगे जिससे अपने परिवार, समाज और देश का नाम रौशन हो सके. वह लड़का कोई और नहीं बल्कि एक सैनिक से अभिनेता बने उत्तर प्रदेश, गाजीपुर जिले में पैदा हुए “यश अजय सिंह” हैं.आज वो जिस मुकाम पर हैं उसका श्रेय अपने पिता द्वारा दी हुई सीख को देते हैं.अजय ने टेलीफोन पर बातचीत के दौरान बचपन से लेकर अबतक के जीवन के सपने और संघर्ष के बारे में बताया.

बचपन से ही था नृत्य एवं एक्टिंग का शौक
उन्होंने कहा कि उनकी कक्षा पांच तक की पढ़ाई गांव के स्कूल में हुई. उसके बाद बारहवीं तक की शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय से हुई. मुझे बचपन से ही नृत्य और एक्टिंग का शौक था.उस समय मेरे मन में कभी सैनिक तो कभी हीरो बनने के ख्याल आते रहते थे. मेरे शरीर और अभ्यास को देख कर दोस्त मुझे अक्सर लेफ्टिनेंट कहा करते थे.उनकी कही बातें धीरे-धीरे मेरे दिमाग़ में बैठ गयी.मैं तैयारी में जुट गया,मेरी मेहनत रंग लायी और फिर भारतीय नौसेना के सबमरीन कैडर में शामिल हो गया. यश ने बताया कि लगभग दस वर्षों तक नौ सेना में सेवा देने के बाद मैं सपनों की नगरी मुंबई आ गया.

पिता जी की सीख ने दिया हौसला
यहां आने के बाद मुझे लगा कि अभिनेता बनने के ख्वाब को पूरा कर सकता हूं. लेकिन फ़िल्म इंडस्ट्री में कोई गॉडफादर नहीं होने की वजह से डर जाता था. तब मुझे अपने पिता की दी हुई सीख “बेटा दिल में जज्बा और मेहनत करने की लगन हो तो इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है” याद आ जाती थी. फिर मै सीरियल में रोल के लिए ऑडिशन देने लगा और मुझे कई सारे छोटे-छोटे रोल मिलने लगे लेकिन मेरी मंजिल अभी दूर थी जिसके लिए लगातार प्रयास करता रहा. एक शूटिंग के दौरान मेरी भेंट जगराज घूमन जी एवं रेणु आहूजा जी से हुई. उन्होंने मुझे “दबंग 3” में रोल के लिए ऑडिशन देने के लिए प्रेरित किया.फिर मेरी मुलाक़ात दबंग सीरीज के एसो.डायरेक्टर आलोक उपाध्याय जी से हुई.मैं उपाध्याय जी का तहेदिल से शुक्रिया अदा करना चाहूंगा कि उन्होंने मेरी योग्यता को पहचाना और सलमान खान जैसे बड़े अभिनेता के साथ काम करने का अवसर प्रदान किया.

वर्दी से लगाव
उन्होंने रियल एवं रील दोनों जीवन में शामिल वर्दी से लगाव के बारे में कहा कि वर्दी को पहनने के बाद अपने अंदर एक अदम्य साहस एवं शक्ति का एहसास होता है.इसे संयोग ही मानता हूं कि सेना में सेवा देने के बाद भी वर्दी और मेरा संबंध जुड़ा हुआ है.शुरू की एक दो फिल्मों में मैं पुलिस वाला बना हूं.आगे आने वाली फिल्मों या वेब सीरीज में आप मुझे अलग-अलग रोल में देखेंगे.

मेरी खुद की कहानी पर्दे पर आएगी


अजय ने अपने वर्तमान एवं आने वाले प्रोजेक्ट्स के बारे में कहा कि मैं एक फ़िल्म “डॉग हाउस” कर रहा हूं.इसके डायरेक्टर एवं को-प्रोड्यूसर समीर कार्निक हैं.जिन्होंने यमला पगला दीवाना, हीरोज, क्यों हो गया न और नन्हे जैसलमेर जैसी कई फ़िल्में बनाई है. इस फ़िल्म में संजय दत्त, आर माधवन, सुनील शेट्टी, जावेद जाफरी और कई एक्टर्स काम कर रहे हैं. अभी लॉकडाउन की वजह से शूटिंग रुकी है, जैसे ही हालात सामान्य होंगे काम शुरू हो जाएगा. मैं गौरांग दोषी प्रोडक्शन के बैनर तले दो वेब सीरीज, जिसमें पहली “लाइन ऑफ़ फायर”, इसमें जिमी शेरगिल, प्रकाश राज, विजय राज के साथ जो एक्शन थ्रिलर है और दूसरी “सेवेंथ सेन्स”, क्राइम एक्शन थ्रिलर/मर्डर मिस्ट्री है, जिसमें आर माधवन, रोनित रॉय, चंकी पांडे के साथ काम कर रहा हूं.इसके अलावा वर्तमान में मैं अपने जीवन के पहले पड़ाव, नौसेना की पनडुब्बी से संबंधी अनुभवों के बारे में एक कहानी लिख रहा हूं.ईश्वर ने चाहा तो अगले साल वो भी बड़े पर्दे पर आ जाएगी.

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