अंबाला में राफेल की एंट्री होते ही देश में दौड़ी ख़ुशी की लहर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीऔर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा,’महाशक्तिशाली बना भारत

रजत सैनी और सुनील कुमार ठाकुर ,अंबाला

शक्तिशाली लड़ाकू राफेल 5 विमानों की पहली खेप ने 29 जुलाई को अंबाला एयरबेस पर लैंडिंग करते ही सारे देश में खुशियों की लहर दौड़ गयी.कोरोना महामारी के चलते देश में लॉकडाउन प्रक्रिया चल रही है.इसके चलते देशवासी अपनी ख़ुशी का इजहार करने के लिए सड़क पर नहीं उतर सके पर लोगों ने अपने घरों समेत सोशल नेटवर्क साईटों पर जोरदार खुशियां मनाई.लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की बड़ी प्रशंसा की.देश के आम नागरिक का भी कहना रहा कि अब सही मायने में भारत एशिया का महाशक्तिशाली राष्ट्र बन गया है. लॉकडाऊन अगर नहीं होता तो आज सारा देश दिवाली ही मनाता.सड़कों पर पाकिस्तान और चीन के साथ युद्ध और क्रिकेट में 
वर्ल्डकप जीत की तरह नजारा होता. हाँ मगर कांग्रेस के राहुल गांधी ने राफेल सौदे को लेकर सवालिया निशान दागे है.        

चीन के साथ विवाद के बीच राफेल लड़ाकू विमानों के आने से भारत की ताकत में इजाफा हो गया है. फ्रांस से भारत के लिए रवाना हुई राफेल (Rafale) लड़ाकू विमान की पहली खेप अंबाला एयरबेस पर पहुंच गई है.विमानों के अंबाला एयरबेस पर पहुंचने के बाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संस्कृत का एक श्लोक ट्वीट करते हुए राफेल को राष्ट्रशक्ति से जोड़ा.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने ट्विटर पर पोस्ट और वीडियो लोड करते हुए कहा कि विमान अंबाला में सुरक्षित तरीके से उतर गए हैं. राफेल लड़ाकू विमानों का भारत में आना हमारे सैन्य इतिहास में नए युग की शुरूआत है. इन बहुआयामी (Multirole) विमानों से वायुसेना की क्षमताओं के क्रांतिकारी बदलाव आएंगे.

राजनाथ सिंह ने अपने ट्वीट में कहा, “राफेल विमान का उड़ान के दौरान प्रदर्शन काफी अच्छा है. इसमें लगे हथियार, राडार एवं अन्य सेंसर तथा इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमताएं दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हैं. भारत में राफेल का आगमन भारतीय वायुसेना को हमारे देश पर आने वाले किसी भी खतरे को रोकने के लिए बहुत मजबूत बना देगा.” रक्षा मंत्री ने राफेल विमान की लैंडिंग का वीडियो भी शेयर किया है.
इससे पहले, जब राफेल विमान के पहले बैच ने भारतीय वायुसीमा में प्रवेश किया तो उनकी सुरक्षा में दो SU30 MKI विमान आसमान में पहुंच गए थे. रक्षा मंत्री कार्यालय की ओर से इसका वीडियो जारी किया गया है. वीडियो में देखा जा सकता है कि पांच राफेल फाइटर जेट के साथ दो SU30 MKI विमान भी चल रहे थे. 
      दुनिया के सबसे घातक लड़ाकू विमानों में शुमार राफेल अब भारत आ चुके हैं.वायुसेना के गोल्डन ऐरो स्क्वाॅड्रन में शामिल होने वाले इन विमानों के आने से वायुसेना को चीन और पाकिस्तान पर कभी भी जीत हासिल होगी.राफेल का मुकाबला करने के लिए चीन के पास जे-20 और पाकिस्तान के पास एफ-16 विमान है तो हमारे पास शक्तिशाली राफेल है.पहाड़ी इलाकों में उड़ान भरने में माहिर राफेल का विंग स्पैन (पंखों का फैलाव) सिर्फ 10.90 मीटर है, जो इसे पहाड़ी इलाकों में उड़ान भरने के लिए आदर्श एयरक्राफ्ट बनाता है. वहीं चीन के जे-20 का विंग स्पैन 13.50 मीटर और एफ-16 का विंग स्पैन 9.96 मीटर है.रडार से बचने की क्षमता राफेल को खास बनाती है वहीँ वह रडार को चकमा देने में माहिर है. राफेल का रडार सिस्टम 100 किमी दायरे में एक बार में 40 टारगेट की पहचान कर सकता है.वहीं, ए-16 का रडार 84 किमी दायरे में केवल 20 टारगेट को पहचान सकता है.राफेल हर मौसम में ऑपरेशन को अंजाम देने में सक्षम है. हर मौसम में काम करने में सक्षम है, इसलिए इसे मल्टी रोल एयरक्राफ्ट के नाम से भी जाना जाता है. राफेल एक मिनट में 18000 मीटर की ऊंचाई पर जा सकता है.वहीं, पाक का एफ16- 15,240 मीटर व चीन का जे20- 18,240 मीटर ऊंचाई पर जा सकता है.
     राफेल में और भी कई खूबियों हैं जो इसे चीन के जे-20 और पाकिस्तान के एफ-16 से बेहतर बनाती हैं. राफेल के भारत में आगमन को दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन के तौर पर भी देखा जा रहा है.राफेल की खेप ऐसे समय में भारत पहुंचना और भी अधिक महत्वपूर्ण है, जब भारत का गलवान घाटी में चीन के साथ टकराव बरकरार है. इसी लिहाज से भारतीय वायुसेना ने राफेल की पहली खेप में आए पांचों विमान को गोल्डन एरो 17 स्वार्डर में शामिल कर अंबाला एयरबेस पर स्थापित किया है.वायुसेना के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार इन पांचों विमानों को आपरेशनल बनाने के लिए वायुसेना के एक्सपर्ट दिन रात काम करेंगे.आने वाले कुछ दिनों में पांचों नए अत्याधुनिक राफेल विमान आपरेशनल हो जाएंगे. इस लिहाज से अंबाला एयरबेस पाकिस्तान और चीन की सीमा तक मिनटों में मारक क्षमता के साथ तैनात रहेंगे. गौरतलब है कि पाकिस्तान की सीमा अंबाला एयरबेस से लगभग सवा 200 किलोमीटर है, जबकि चीन की सीमा करीब 300 किलोमीटर पर है.जबकि राफेल की रफ्तार 1920 किलोमीटर प्रति घंटा है.यानी 7 से 10 मिनट के बीच यह अपने दोनों शत्रुओं की सीमा तक पहुंचने में सक्षम है.यह लड़ाकू विमान अत्याधुनिक तकनीक से लैस है.नई जनरेशन और स्टील्थ तकनीक का कोई भी लड़ाकू विमान एशिया में किसी देश के पास नहीं है.यहां तक की चीन, रूस और पाकिस्तान के पास भी ऐसा कोई लड़ाकू विमान नहीं है.चीन के पास सबसे आधुनिक विमान जे-20 और पाकिस्तान के पास एफ 16 है। भारत के दोनों ही पड़ोसी और शत्रु मुल्क इस नए राफेल के सामने कहीं नहीं ठहरते. राफेल एक मिनट में 18 हजार मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है यानी प्रति सेकेंड 300 मीटर.  यह हैमर तकनीक से लैस है.देश के प्रहरी राफेल हर वक्त अंबाला एयरबेस पर स्टैंडबाय रहेंगे और सेना से कमांड मिलते ही दुश्मन पर टूट पड़ेंगे .विशेष  विंग कमांडर हरकीरत समेत कई अन्य पायलेट राफेल का प्रशिक्षण लेकर लौटे हैं.
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