राजस्थान —सरकारी स्कूल के शिक्षक भी अब नजर आएंगे आईडी कार्ड में।

भरतपुर व्यूरो चीफ
यतेन्द्र पाण्डेय्
बीरेंद्र चंसौरिया की रिपोर्ट
बाड़ी/धौलपुर।अब तक मल्टीनेशनल कंपनीयो एवं बड़े निजी शिक्षण संस्थानों सहित प्राइवेट अस्पतालों में कर्मचारी अपने गले में आईडी कार्ड डालकर नजर आते थे। लेकिन अब प्रदेश के शिक्षा विभाग ने सरकारी विद्यालयों के सरकारी अध्यापकों के लिए भी आईडी कार्ड जारी किए हैं। जिन्हें शिक्षक विद्यालय समय में अपनी गर्दन में डालकर रखेंगे। शिक्षा विभाग की इस नई पहल का स्वागत करते हुए राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम के प्रदेश उप सभाध्यक्ष सुरेश भारद्वाज ने कहा कि शिक्षा विभाग की यह अभिनव पहल बहुत ही सराहनीय है। विभाग द्वारा सरकारी शिक्षकों के लिए जारी किए गए आईडी कार्ड बहुउद्देशीय होंगे ।भारद्वाज ने कहा कि विभाग द्वारा जारी यह आईडी कार्ड शिक्षकों के लिए विभिन्न क्षेत्रों में परिचय पत्र के रूप में काम आएंगे ।साथ ही विद्यालय में आने वाले अभिभावकों एवं अधिकारियों को शिक्षकों को पहचानने में भी सहूलियत रहेगी। उन्होंने कहा कि विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी भी सभी शिक्षकों के नाम नहीं जानते हैं। ऐसे में अध्यापक के गले में परिचय पत्र होने से विद्यार्थियों को भी अपने शिक्षकों के नाम की जानकारी रहेगी। वहीं दूसरी ओर इस आईडी कार्ड से शिक्षकों में भी एक अलग तरह का उत्साह है ।भारद्वाज ने कहा कि विभाग को विद्यार्थियों के लिए भी इसी तरह के आईडी कार्ड जारी किए जाने चाहिए। जिससे विद्यार्थियों में भी उत्साह का वातावरण बने तथा सरकारी विद्यालय भी निजी विद्यालयों की तर्ज पर दिख सके। उन्होंने कहा कि विभाग को शिक्षकों के लिए एक पोशाक भी निर्धारित करनी चाहिए। भारद्वाज ने कहा कि वर्तमान में सरकारी विद्यालय निजी विद्यालयों से हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में सरकारी विद्यालयों में भी निजी विद्यालयों के अनुसार भौतिक संसाधनों के साथ-साथ ड्रेस कोड लागू होना चाहिए। जिससे अभिभावक अधिक से अधिक संख्या में अपने बच्चों का दाखिला सरकारी विद्यालय में कराएं। उन्होंने कहा कि निजी विद्यालय अपना एक डेकोरम बनाकर अभिभावकों को अपनी संस्थाओं के प्रति आकर्षित करते हैं। जब यह डेकोरम सरकारी विद्यालयों में भी अभिभावकों को देखने को मिलेगा, तो निश्चित रूप से अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला निजी विद्यालयों के बजाय सरकारी विद्यालयों में कराएंगे। भारद्वाज ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षक उच्च योग्यता धारी होते हैं ।साथ ही विभिन्न प्रकार की परीक्षाएं उत्तीर्ण करके सरकारी सेवा में आते हैं। तो निसंदेह रूप से उनका शिक्षण भी प्रभावी होता है। लेकिन सरकारी विद्यालयों में अभी भी आवश्यकतानुसार भौतिक संसाधनों की कमी होने एवं पर्याप्त मात्रा में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने के साथ साथ शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में वर्ष पर्यंत लगाएं रखने से सरकारी विद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। जिसका असर सरकारी विद्यालयों पर नकारात्मक पड़ता है। लेकिन अब धीरे-धीरे सरकार एवं विभाग इस बात को समझ रहा है और कुछ नए बदलाव शिक्षा विभाग में हो रहे हैं ।कुछ भविष्य में होने वाले हैं। उन्होंने बताया कि जिले में मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जिले के समस्त शिक्षकों के लिए आईडी कार्ड अपने हस्ताक्षर से जारी किए गए हैं।

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