‘कल्लूर निवासिनी महालक्ष्मी’ पुस्तक के हिन्दी- मराठी अनुवाद का विमोचन संपन्न

जलगांव —-  कर्नाटक राज्य के रायचूर निवासी श्री वी एस कांतनवर प्रसिद्ध द्विभाषा साहित्यकार है। कन्नड़ तथा हिंदी भाषा में उनकी अनेक कृतियां प्रकाशित हुई है। साहित्य श्रुतिकार, नवरंग भूषण, विप्रश्री आदि उपाधियों से पुरस्कृत वरिष्ठ साहित्यकार गुरुश्री कांतनवर 87 वर्ष की आयु में भी साहित्यिक और संगठन कार्य में सक्रिय है। उनकी एक प्रसिद्ध कन्नड़ कृति ‘कल्लूर निवासिनी’ पुस्तक की अबतक छः आवृत्तिय प्रकाशित हो चुकी है। प्रस्तुत इस कृति का जलगांव -खानदेश के पत्रकार, लेखक श्री किशोर ज्ञानेश्वर कुलकर्णी ने मराठी में तथा श्रीमती डी कोमला ने हिंदी में अनुवाद किया है।
कल्लूर निवासिनी मैं सुक्षेत्र कल्लूर का दर्शन है। यह पुण्य स्थल कर्नाटक राज्य के रायचूर जिले के मानवी तालुक में है। यह सर्वविदित है कि माता महालक्ष्मी वैकुंठ से आकर कोल्हापुर में विराजमान है। वही महालक्ष्मी देवी अपने एक भक्त के उद्धार हेतु कल्लूर में आकर आज भी भक्तों का कल्याण कर रही हैं। इस प्रसंग का संपूर्ण वर्णन कांतनावर जी ने विस्तार से गद्य और पद्य रूप में लिखा है। श्रीदेवी की स्तुति पद्य और सुदीर्घ सुप्रभात भी इसमें है। साथ ही साथ ग्राम के अनेक विशेषताओं का भी उल्लेख है।
कृति में प्रस्तावित कथन काव्य का अनेक गमक कार्यक्रम हुए हैं। श्रीमती डी कोमला के निर्देशन में गीत रूपक के रूप में रंग प्रयोग भी हुआ है। संपर्क साधना संस्था ने देवी के स्तुति पदों की कैसेट भी बनाया है। श्री टी आर राव् ने इस कृति का आंग्ल भाषा में अनुवाद भी किया है। इस तरह कन्नड़ भाषियों में चिर परिचित यह ग्रंथ अब हिंदी और मराठी पाठकों के लिए भी उपलब्ध है।
हाल ही में कृति के मूल लेखक कांतनवरजी के सानिध्य में, दास साहित्य सभा के कार्याध्यक्ष एस् एम् शशिधर की अध्यक्षता में कृतियों का लोकार्पण कार्य संपन्न हुआ। द्विभाषा कवित्री श्रीमती डी रुक्मिणी ने लोकार्पण किया। इस संदर्भ में कांतनवरजी ने कहा कि अनुवाद कार्य परकाया प्रवेश ही है और दोनों कृतियां मूल कृति का प्रतिफलन करती हैं।
मराठी में अनुवाद कार्य करने वाले श्री किशोर कुलकर्णी गूगल मीट के द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित होकर कहा कि कोल्हापुर और कल्लूर का यह संबंध ने महाराष्ट्र और कर्नाटक के बांधव्य को और सुदृढ़ बनाया है। कन्नड़ अनुवादकी श्रीमती डी कोमला ने कहा कि मेरे साहित्य गुरु श्री वी एस् कांतनवर के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से ही यह कार्य संपन्न हो सका है। गायिका श्रीमती विद्या जगन्नाथ ने कल्लूर निवासिनी कथन काव्य का गायन प्रस्तुत किया। अरुण वी कांतनवर, फकीरप्पा वज्रबंडी, पलुगुल नागराज, मधु पांडे, श्री वाणी और कांतनवर उपस्थित थे।

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