लक्ष्मणगढ़ ब्लॉक कोविड सेंटर ,सुरक्षा गार्ड और सफाई कर्मचारियों के ही भरोसे,बेटियों के बैड और गद्दे पर कोरोना पॉजिटिव मरीजों का राज,भर्ती वार्ड में कोरोना पॉजिटिव मरीजों ने बताया ना डॉक्टर है, ना कंपाउंडर, फिर किसके भरोसे:–राम ही है रखवाला

अलवर व्यूरो चीफ
यतेन्द्र पाण्डेय
लक्ष्मणगढ़ अलवर से

गिर्राज प्रसाद सोलंकी की रिपोर्ट

उपखंड मुख्यालय लक्ष्मणगढ़ के हरसाना मोड़ पर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के भवन में चल रहा कोविड सैन्टर जबकि आवासीय विद्यालय के अंदर बालिकाएं रहती थी ।ऐसे में जब कोविड-सैन्टर खोला गया तो प्रशासन ने बिल्कुल भी नहीं सोचा की बालिकाओं के लिए भी परेशानी का सबक बन सकती है ।कोविड-सैन्टर खोलना ही था। तो प्रशासन को ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय के अंदर खोलना था ।वह काफी बड़ी बिल्डिंग है खाली है। या फिर चिकित्सा स्वास्थ्य केंद्र लक्ष्मणगढ़ के सामुदायिक धर्मशाला के अंदर खोलना था। ऐसे में उन पढ़ने वाली बच्चियों के बिस्तर ऊपर मरीजों का राज हो रहा है अब कोरोनो जैसी महामारी फैले तो क्यों ना फैले सोचने का विषय है पर यहां तो प्रशासन बिल्कुल लापरवाह बना है।कोरोना पॉजिटिव मरीज जब सेंटर के अंदर भर्ती होता है। तब कहीं डॉक्टर कंपाउंडर उपलब्ध होते हैं और एक बार ही दवा देकर नदारद मिलते हैं इधर मरीजों का कहना है कि 4 दिन से हमने ना डॉक्टर देखा है ना कंपाउंडर देखा है ना हमारा बराबर टेंपरेचर नापा जा रहा है और तो और पानी की व्यवस्था नहीं ना समय पर चाय है ना समय पर खाना इस तरह की बात कहते मरीज सामने आए और मरीजों ने कहा कि यहां केवल सफाई कर्मचारी और गॉड हैं जिनके भरोसे हम यहां रुके हैं। इससे तो अच्छी व्यवस्था जेल के अंदर भी होती है। वहां समय के अनुसार भोजन मिलता है समय के अनुसार नाश्ता मिलता है ।समय-समय पर दवा तो वहां भी दी जाती है। पर यहां हमें कमरों में बंद करके और यातना सी दे रखी है। क्या इस प्रकार कोरोनाजैसी महामारी पर हम जंग जीत पाएंगे जिन्हें हम भगवान मानते हैं। वह डॉक्टर ही इस तरह लापरवाही दिखाएंगे तो कैसे भविष्य सुधरेगा। इधर कोविड-सैन्टर खुलने के पश्चात ही विद्यालय में अध्यनरत छात्राएं वह हॉस्टल में रहने वाली छात्राएं सभी अपने अपने टी.सी कटा करके अपने अपने घर को जाने लगी हैं जिससे स्कूल में नामांकन का स्तर भी गिरता दिखाई दे रहा है बच्चियों का कहना है जब हमारे भवन के अंदर कोविड-सैन्टर ही खोल दिया गया है। और हमारे बिस्तर पर मरीजों का राज है फिर हम भी तो कोरोना पॉजिटिव हो सकते हैं ।इससे तो बढ़िया हम अन्यत्र चले जाएंगे। ऐसी महामारी के अंदर हमें नहीं रहना।

रमेश चंद गांधी प्रधानाचार्य राजकीय बालिका सीनियर माध्यमिक विद्यालय लक्ष्मणगढ़ अलवर राजस्थान ने भी इस बात पर गहरी चिंता जताई।

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