जयपुर का इतिहास, संस्कृति, विरासत, स्थापत्य कला,सत्कार और खूबसूरती का बेजोड़ उदाहरण है

राजस्थान  प्रभारी
यतेन्द्र पाण्डेय्

जयपुर ,राजस्थान से

दिनेश पाठक की रिपोर्ट

जयपुर जिसे गुलाबी नगर के नाम से भी जाना जाता है, भारत में राजस्थान राज्य की राजधानी है। आमेर के तौर पर यह जयपुर नाम से प्रसिद्ध प्राचीन रजवाड़े की भी राजधानी रहा है। इस शहर की स्थापना १७२८ में आमेर के महाराजा जयसिंह द्वितीय ने की थी। जयपुर अपनी समृद्ध भवन निर्माण-परंपरा, सरस-संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।[2] यह शहर तीन ओर से अरावली पर्वतमाला से घिरा हुआ है।[3] जयपुर शहर की पहचान यहाँ के महलों और पुराने घरों में लगे गुलाबी धौलपुरी पत्थरों से होती है जो यहाँ के स्थापत्य की खूबी है। १८७६ में तत्कालीन महाराज सवाई रामसिंह ने इंग्लैंड की महारानी एलिज़ाबेथ प्रिंस ऑफ वेल्स युवराज अल्बर्ट के स्वागत में पूरे शहर को गुलाबी रंग से आच्छादित करवा दिया था। तभी से शहर का नाम गुलाबी नगरी पड़ा है। 2011 की जनगणना के अनुसार जयपुर भारत का दसवां सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर है ।राजा जयसिंह द्वितीय के नाम पर ही इस शहर का नाम जयपुर पड़ा । जयपुर भारत के टूरिस्ट सर्किट गोल्डन ट्रायंगल (India’s Golden Triangle) का हिस्सा भी है |इस गोल्डन ट्रायंगल में दिल्ली ,आगरा और जयपुर आते हैं भारत के मानचित्र में उनकी स्थिति अर्थात लोकेशन को देखने पर यह एक त्रिभुज (Triangle) का आकार लेते हैं |इस कारण इन्हें भारत का स्वर्णिम त्रिभुज इंडियन गोल्डन ट्रायंगल कहते हैं| भारत की राजधानी दिल्ली से जयपुर की दूरी 280 किलोमीटर है |

विश्व के शीर्ष पर्यटन स्थलों में एक तथा यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल गुलाबी नगरी जयपुर का 293 वां स्थापना दिवस है।
जयपुर का इतिहास, संस्कृति, विरासत, स्थापत्य कला,सत्कार और खूबसूरती का बेजोड़ उदाहरण है। जिसमें 9 चौक, 3 चौपड़ एवं 15 दरवाजे है।

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