बाल अधिकार सप्ताह’’ के अंतर्गत राजकीय बाल संप्रेषण गृह धौलपुर में हुआ विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन –बाल विवाह दण्डनीय अपराध- शक्ति सिंह

भरतपुर संभाग चीफ,यतेन्द्र पाण्डेय
धौलपुर से बीरेंद्र चंसौरिया की रिपोर्ट

धौलपुर , राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर द्वारा चलाये जा रहे ’’बाल अधिकार सप्ताह’’ (दिनांक 14.11.2020 से 20.11.2020 तक) के अन्तर्गत 20.11.2020 को सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश) धौलपुर शक्ति सिंह द्वारा राजकीय सम्प्रेषण एवं किशोर गृह धौलपुर में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में सिंह द्वारा बताया गया कि बालकों का शारीरिक, मानसिक एवं बैद्धिक दृष्टि से सुदृढ एवं संस्कारित होना आवश्यक है। यही कारण है कि बालकों का सर्वागींण विकास के लिए भारत के संविधान और कानूनों में उन्हें कई महत्वपूर्ण अधिकार प्रदान किए गए हैं और उनके हितों को संरक्षण प्रदान किया गया है। हमारे संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रत्येक व्यक्ति को, जिसमें बालक भी सम्मिलित है, जीवन जीने का अधिकार प्रदान किया गया है। बालक को सम्मानजनक एवं मानव गरिमा युक्त जीवन जीने का अधिकार है। बालक को इस अधिकार से अवैध रूप से वंचित नहीं किया जा सकता। छः से चौदह वर्ष के प्रत्येक बालक को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 3 में प्रत्येक बालक को निःशुल्क प्रारम्भिक शिक्षा प्रदान करने की राज्य द्वारा गारण्टी दी गई है। अभिभावकों का भी यह कर्त्तव्य है कि वे अपने बालकों को शिक्षा के लिए विद्यालय में प्रवेश करेंगे। संविधान के अनुच्छेद 23 व 24 में यह कहा गया है कि किसी भी बालक का न तो शोषण किया जायेगा और न ही उससे बेगार ली जा सकती है। सिंह द्वारा बाल विवाह निषेध कानून, 2006 के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि विवाह हेतु बालक की आयु 21 वर्ष और बालिका की आयु 18 वर्ष होने पर ही विवाह का आयोजन करना चाहिए। इससे पूर्व विवाह का आयोजन बाल विवाह की श्रेणी में आता है। ऐसे बाल विवाह के आयोजन में सम्मिलित होने वाला पंडित, नाई, बैण्ड बाजे वाले, फोटोग्राफर, रिश्ते-नातेदार एवं परिवारीजन सभी अपराधी की श्रेणी में आते हैं। जुर्म प्रमाणित पाये जाने पर कारावास एवं अर्थदण्ड से दण्डित किये जा सकते हैं। समाज का जिम्मेदार व्यक्ति होने के नाते कोई भी व्यक्ति इसकी सूचना संबंधित पुलिस थाने, एसडीएम, तहसीलदार अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को दे सकता है और ऐसे बाल विवाह के आयोजन को समय से पूर्व सूचना देकर रोका जा सकता है।

’’बाल अधिकार सप्त ऑनलाईन वेबक्स के माध्यम से विधिक जागरूकता आयोजीत कार्यक्रम में सिंह द्वारा बालकों के जीवन जीने का अधिकार, निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार, दण्ड से मुक्ति का अधिकार, शोषण के विरूद्ध अधिकार, कारखानों में नियोजन से सुरक्षा का अधिकार, भरण-पोषण का अधिकार, बाल विवाह से बचने का अधिकार इत्यादि कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैनल अधिवक्ता रामदत्त श्रोती द्वारा भी बालकों के हित में विभिन्न विषयों पर कानूनी विधिक अधिकारों के बारे में जानकारी प्रदान की।

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