श्री श्वेताम्बर जैन तीर्थ सिरस आस्था की स्थली, सिरस जैन मन्दिर पर हो रहा 24 तीर्थकर का निर्माण, बंसी पहाडपुर के पत्थर से बन रहा मन्दिर, विश्व के प्रसिद्व जैन मन्दिर सूची में शामिल है सिरस का मन्दिर

हलैना से विष्णु मित्तल

भरतपुर जिले के उपखण्ड वैर के गांव सिरस में स्थित श्री श्वेताम्बर जैन तीर्थ देश-विदेश के जैन समुदाय का आस्था का केन्द्र है,जहां कलिकाल कल्पतरू भगवान श्री महावीर जी की प्रतिमा विराजमान है,जिसके जैन समुदाय के अलावा अन्य धर्म के लोग भी दर्शन को आते है,जिनमें जैन व हिन्दु समुदाय के वैश्य समाज सर्वाधिक आता है। ये जैन समुदाय के विश्व के प्रसिद्व जैन मन्दिरों की सूची में शामिल है और करीब दो हजार पुराना है। मन्दिर की देखभाल एवं रखरखाव को ट्रस्ट बना हुआ है,जो मन्दिर का जीर्णोद्वार सहित अनेक कार्य करा रहा है। साल में अनेक उत्सव,मेला एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम होते है। मन्दिर के जीर्णेद्वार एवं निर्माण में भरतपुर जिले के विश्व विख्यात बयाना-रूपवास उपखण्ड के बंसी पहाडपुर के अरावली पर्वत माला की श्रेणियों के सफेद,लाल एवं गुलाबी पत्थर का उपयोग हो रहा है और साल 1986-87 से आज तक लगातार पत्थर की शिल्पकारी एवं मन्दिर निर्माण कार्य जारी है। अब मन्दिर पर भगवान श्री महावीर जी के अलावा जैन समुदाय के 24 तीर्थकर भगवान की प्रतिमाएं स्थापित होगी,जिसका निर्माण कार्य प्रगतिशील है।
प्रजापत को मिटटी खुदाई मिली प्रतिमा
गांव सिरस के जैन मन्दिर में विराजमान भगवान कलिकाल कल्पतरू भगवान श्री महावीर जी की प्रतिमा को लेकर अनेक किदवंतियां है,जिनमें प्रजापत की मिटटी खुदाई मिली सर्वाधिक है। हिण्डोन निवासी महावीरप्रसाद जैन एवं बाबूलाल जैन ने बताया कि करीब 300 साल पहले गांव सिरस निवासी एक प्रजापत परिवार मिटटी के वर्तन बनाने को पोखर से मिटटी निकाल रहा था,उसी समय मिटटी की खुदाई करते समय प्रतिमा मिली,जिसने उसे गांव के लोगों को एकत्रित कर चबूतरा पर विराजमान करा दिया पूजा-अर्चना करते रहे। आज प्रतिमा के प्रति जैन समुदाय की आस्था है,जो देश-विदेश के दर्शन का आते है।
-सिरस की कई बार चोरी हुई प्रतिमा
ट्रस्ट के उपाध्यक्ष बाबूलाल जैन ने बताया कि अज्ञात चोर भी गांव सिरस स्थित जैन मन्दिर में विराजमान भगवान श्री महावीर जी की प्रतिमा को चोरी करने में कई बार असफल रहे और चार बार प्रतिमा चोरी भी हो गई,लेकिन प्रतिमा का चमत्कार देख चोर प्रतिमा को वापिस छोड गए,जो आज भी आमजन में धारणा है कि प्रतिमा ने अज्ञात चोरों को अन्धा एवं लगडा कर दिया,जो चोरी करने में सफल हुए,लेकिन प्रतिमा की शक्ति एवं चमत्कार को देख झुक गए और प्रतिमा को वापिस छोड गए। ये प्रतिमा साल 1970,1980 एवं 1986 में प्रतिमा चोरी हुई,अन्तिम चोरी 25 नवम्बर 1986 में हुई,उस समय चोर प्रतिमा को हलैना के पास जंगल में पटक गए। चैथी चोरी लाॅकडाउन में हुई,चोर केवल छत्र,मुकुट आदि को चुरा कर ले गए,जिसे भी चोर वापिस मन्दिर के पास ही जंगल में पटक गए।
-ये जैन तीर्थकर होगें विराजमान
श्री श्वेताम्बर जैन तीर्थ सिरस पर नव निर्माणाधीन 24 तीर्थकर जैन मन्दिर पर भगवान श्री महावीर जी के अलावा अब जैन धर्म के तीर्थकर ऋषभदेव, अजितनाथ,सम्भवनाथ,अभिनंनदन,सुमतिनाथ,पद्यमप्रभु,सुपाश्र्वनाथ, चन्दाप्रभु, सुविधिनाथ,शीतलनाथ, श्रेयांसनाथ,वासुपूज्य,विमलनाथ,अनंतनाथ, धर्मनाथ, शान्तिनाथ,कुंथनाथ,अरनाथ,मल्लिनाथ,मुनिसुव्रत,नमिनाथ,अरिष्टनेमि, पाश्र्वनाथ की प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा होगी
वैशाख में लगता मेला
श्री श्वेताम्बर जैन तीर्थ ट्रस्ट एवं जैन समुदाय की ओर से गांव सिरस के मन्दिर पर अनेक धार्मिक कार्यक्रम होते है,लेकिन वैशाख वदी पंचमी के दिन प्रति साल मेला लगता है,जिस दिन रथयात्रा निकाली जाती है और अनेक कार्यक्रम आयोजित होते है। जैन समाज के विनोद कुमार जैन ने बताया कि वैशाख वदी पंचमी के दिन दीवान जोधाराज पल्लीवाल बहिन से मिलने रथ से आए,जिनकी यादगार में प्रतिवर्ष रथ मेला लगता है। जिसमें राजस्थान,गुजरात, उत्तरप्रदेश, दिल्ली,महाराष्ट्र,मध्यप्रदेश,हरियाणा आदि प्रान्त से जैन समुदाय के लोग आते है।
-धन्धा का अभाव देख किया पलायन
गांव सिरस में करीब 250 पहले तक जैन समुदाय के अनेक परिवार भी निवास करते,लेकिन धन्धा कमजोर एवं सूखा से परेशान होकर व्यापार के उददेश्य ये अन्य स्थान को पलायन कर गए,जहां उनका धन्धा पनप गया और वहां ही स्थाई निवास बना लिया। जो केवल गांव सिरस में मन्दिर के दर्शन का आते है और कुछ दिन ठहराव का वापिस लौट जाते है। विनोद कुमार जैन ने बताया कि सिरस गांव प्राचीनकाल में जैन समुदाय का था,जहां भारी सख्यां में जैन परिवार रहते,जिनके आज भी गांव में घर बने हुए है,ग्रामीणों द्वारा कभी-कभी गांव में निर्माण कराते समय मन्दिर के पत्थर व प्राचीन ईंट आदि निकलते है और गांव के लोग आज भी गांव सिरस को जैन समुदाय का गांव बताते है।
विदेशी शासकों ने किया परेशान
गांव सिरस के गणमान्य नगारिक ओमप्रकाश शर्मा एवं रामप्रसाद धाकड बताया कि गांव सिरस प्राचीनकाल से जैन समाज का रहा,यहां जैन मन्दिर है,जिसमें भगवान श्री महावीर जी की प्रतिमा स्थापित है। गांव के बुर्जग लोग बताते थे कि हजारों साल पहले विदेशी एवं मुगल वंश के शासकों के भयं के कारण जैन समाज के अनेक परिवार गांव से पलायन कर गए,गांव में आज एक भी परिवार जैन समाज का नही रहता है,पडौसी गांव हलैना, मूडिया साद,मौलोनी,वैर,खेरलीगंज आदि में जैन समाज रहता है,जो गांव में जैन मन्दिर के दर्शन को आते रहते है।
भाई-बहिन के प्रेम का प्रतीक
गांव सिरस का जैन मन्दिर भाई-बहिन के प्रेम का प्रतीक कहलाता है,जिसका आज भी गुणगान होता है। ट्रस्ट के अध्यक्ष महावीरप्रसाद जैन एवं उपाध्यक्ष बाबूलाल जैन ने बताया कि संवत 1828 में भरतपुर रियासत के तत्कालीन महाराजा के दीवान रहे अलवर जिले के गांव हरसाणा निवासी दीवान जोधराज पल्लीवाल की व्याही थी,जो अपनी बहिन के सर्वाधिक प्रेम एवं लगाव रखते थे,एक बार दीवान पल्लीवाल गांव सिरस में बहिन से मिलने आए,जिन्होने बहिन की कृपा से भगवान श्री महावीर जी की प्रतिमा के दर्शन किए,जो एक चबूतरा पर विराजमान थी,दीवान पल्लीवाल ने बहिन के आग्रह पर गांव के लोगों को एकत्रित कर मन्दिर निर्माण कराया और प्रतिमा की प्रतिष्ठा कराई। जैन समुदाय सहित अन्य ग्रामीण आज भी पुराने मन्दिर को भाई-बहिन का प्रेम का प्रतीक वाला मन्दिर कहते है।

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